मेरा नाम पल्लवी है। मेरी उम्र 23 साल है। मैं परियो की तरह बहुत ही खूबसूरत हूँ। मेरा कद भी लंबा है। मैं 5 फीट 8 इंच की हूँ जो की लड़कियों की के लिए काफी है। मैं जब चलती हूँ तो मेरे बड़े बड़े मम्मे बहुत ही तेजी से उछल उछल कर लड़कों का लंड खड़ा कराये रहते है। मैं भी एक लड़की हूँ। मेरा भी  मन चुदने को बहुत करता था। लेकिन मैं अपने आस पास के लड़को से नहीं चुदवाती। चोदने के बाद वही रंडी और पता नहीं क्या शुभ शुभ नाम रखने लगते है। मेरी  गांड भी बहुत जबरदस्त गोल मटोल दिखती है। चूंचियो की तरह वो भी बहुत ही सॉफ्ट है। मेरी चूत की तो बात ही अलग है। वो भी फूली हुई गद्दे की तरह है। ढेर सारा माल उसमें उसमे भरा हैं।  दोस्तों मै अब अपनी कहानी पर आती हूँ।

 बात एक साल पहले की है। मैं अपनी कहानी आप लोगो की खिदमद में पेश करने को परेशान थी। ये मेरे साथ घटित सच्ची घटना है। जो की एक सफर के दौरान घटित हुई। मै उस समय तैयारी करने कानपुर जा रही थी। छुट्टियां थी तो मैं अपने घर देवरिया आयी हुई थीं। मै ट्रेन में सिंगल शीट पर बैठी हुई थी।खिड़कियों से आती हवाओ का मजा ले रही थी। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। चुदने का भी मन उन हवाओ ने बना डाला। इतने सुहाने मौसम में अब मुझे अपने चूत के राजकुमार का इंतजार होंने लगा। मै चुदने को तड़पने लगी। मेरी चूत के कीड़े जाग गये। वो काट काट कर खुजली करने लगे। मै कहने लगी- “हे भगवान मेरे लिए भी किसी लंड का इंतजाम कर दो” भगवान ने मेरी सुन भी ली।

यही सब मै सोच कर मन ही मन कह ही रही थी कि अगला स्टेशन आ गया। मै स्टेशन की तरफ देख रही थी। मुझे एक लगभग 25 साल का लड़का मेरे ही डिब्बे की तरफ बढ़ता दिखाई दिया। उसका लंबा शरीर और गठीला बदन बहुत ही आकर्षक लग रहा था। मैं पहली बार सुंदरता के साथ किसी लड़के को इस तरह देख रही थी। मैने उसके लिए तो अपनी जान रख दी। वो अंदर की तरफ शीट को ढूंढता हुआ आ रहा था। मेरे सामने वाली शीट खाली थी। उसकी पर आकर वो बैठ गया। मै अपने कान में एअरफोंन लगाए गाने का मजा ले रही थी। वो भी अपनी गांड को शीट पर टिकाकर बैठ गया। मेरी तो उस लड़के से नजर ही नहीं हट रही थी। उसने भी अपना सामान रख कर फुरसत पाई तो उसकी नजर मुझ पर पड़ ही गई। हम दोनो नैंन मटक्का करने लगे। मै भी कोई कम स्मार्ट थोड़ी थी। कुछ देर बाद हमने बोलना शुरू किया।

मै- “हाय आई ऍम पल्लवी”

वो- “निशांत…. निशांत मिश्रा”

मुझे उसके इस तरह से बोलने की स्टाइल बहुत अच्छी लगी।

मै- “आप को भी कानपुर जाना है क्या”

निशांत- “हॉ। मुझे भी वही अपनी बुआ के यहाँ जाना है। कुछ दोस्त सरकारी नौकरी की भी करते है, तो उनसे मिलने भी जाना है”

मै- “आप क्या करते हो???”

निशांत- “मैं भी मेडिकल की तैयारी कर रहा हूँ लेकिन खुद ही। कही कोचिंग के लिए नहीं गया”

धीरे धीरे उससे बात करते करते मैंने उसके लंड की तरफ अपनी नजर नीचे करके देखी। उसका लंड खड़ा हो चुका था। उसने देखते ही अपना बैग लंड पर पेंट के उपर रख लिया। मैंने उसका प्रेसर बढ़ाने के लिए अपना दुपट्टा अपने सीने से हटा दिया। मै झुक कर उससे बात करने लगी। मेरी लटकती चूंचिया  मेरे वी शेप गले में साफ़ साफ़ दिखने लगी। उसका लंड तो देखते ही मीनार बन गया । निशांत थोड़ा रोमांटिक होकर बात करने के मूड में आने लगा। अपना बैगअपनी शीट पर रख कर हम दोनो दरवाजे के पावदान पर जाकर बैठ गए। आप लोगो को तो पता ही होगा। पावदान पर कितनी जगह होती है। हम दोनों चिपक कर बैठे हुए थे। ट्रेन सरपट सरपट पटरियों पर दौड़ रही थी। उसके शरीर के स्पर्श से ही मुझे बहुत मजा आ रहा था। आज जिंदगी में पहली बार किसी लड़के के इतनी पास चिपक कर बैठी थी। आज मुझे ईश्वर ने लंड के साथ उसका ड्राइवर भी दे दिया।

निशांत- “कानपुर में अकेली ही रहती हो”

मैं- “हाँ”

निशांत शक भरी नजरों से- “फिर तो तुम्हारा बॉयफ्रेंड होगा”

मै- “नहीं मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है। मैंने आज तक किसी लड़के से बात तक नही की है”

निशांत- “ये तो सभी कहती है”

मै- “तुमको मै ऐसी वैसी लड़की दिखती हूँ” इतना कहकर मै गुस्से से उठकर चलने लगी। निशांत ने मुझे पकड़ कर बैठा लिया। उसके बाद मेरे कंधे पर अपना एक हाथ रख कर एक हाथ मेरा पकड़ कर। मुझे अपने दिल का हाल बताने लगा। कहने लगा- “लडकियां तो बहुत देखी। लेकिन तुम्हे देखकर दिल में हलचल होने लगी। अभी तक मुझे लड़कियां प्रपोज़ करती थी। लेकिन आज पहली बार मैं किसी लड़की को प्रपोज़ करने जा रहा हूँ” मै मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। आज मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी बनने वाला था। मैं ख़ुशी से झूम उठी।  उसने फ़िल्मी स्टाइल में मेरे हाथों को पकड़ कर कहने लगा- “पल्लवी मै तुम्हेदेखते ही बहुत चाहनें लगा हूँ। मै तुमसे बहुत प्यार करने लगा हूँ। क्या तुम मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाओगी???”

मै- “सच तो ये भी हैं कि मैं भी कुछ इसी तरह का ख्याल अपने दिल में रखे हूँ। जो आग तुम्हारे दिल में लगी है। वो मेरे दिल में भी है” उसने समझ लिया की मैने उसे अपना बॉयफ्रेंड बना लिया है। लेकिन अब कौन बताये की आग कहाँ कहाँ लगी हुई है। उसने मुझे गाल पर किस किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने भी तुरंत जबाब दे डाला। मैंने भी किस करके पूरा कर दिया। उसने कहा-” मै तुम्हे मिलना चाहता हूं”  मैनें अपना पता उसे बता दिया मै कहाँ रहती हूँ। वो भी मुझे अपना फ़ोन नम्बर वगैरह बताने लगा। उसने पूछा- “मै तुम्हारे रूम पर आऊं तो कोई कुछ बोलेगा तो नहीं”

मै- “बता दूँगी की भैया है” इतना कहकर मै हँसने लगी…

वो मुझे चिपका कर होंठ पर किस करने लगा। मै भी उसका साथ दे रही थी। कुछ ही पल में पीछे कोई आ गया। दोनों लोग एक दुसरे को देखकर हसते हुए अलग हुए। बाद में मौक़ा मिलते ही वो एक मिनट कभी दो मिनट किस करते करते पूरा रास्ता कट गया। चलते चलते निशांत ने मेरे मम्मो को दबा ही दिया। मम्मो को दबाते ही गाडी ने  आवाज की और स्टेशन आ गया। हम दोनो को अधूरी चुदाई की प्यास बहुत ही तड़पा रही थी। स्टेशन से नीचे आते ही दूसरे दी मिलने का वादा किया। मैंने अपने कोचिंग जाने से मना भी कर दिया था। मैं तुम्हारा पूरा दिन इन्तजार करूंगा।  इतनी बात करके वो अपनी बुआ के घर चल दिया। मै भी अपने रूम पर आई। रात को नींद ही नहीं आ रही थी। मैंने अपने सारे कपडे भी उतारे दिये।

सोच सोच करके अपनी चूंचियो को मसल रही थी। मै बहुत ही गर्म हो चुकी थी। पहले सब्जियों से ही चुदाई कर लेती थी। आज भी टोकरी में जाकर देखा तो सूखा सूखा बैगन पड़ा था। आज हाथ से ही काम चलाना पड़ रहा था। मैंने किसी तरह से रात भर हाथ से काम चलाकर अपनी रात काटी। सुबह से मेरी बेचैनी और भी बढ़ने लगी। पूरा दिन भी बीत गया। निशांत नहीं आया। मेरे सारे सपनो पर लग रहा था पानी फिर जाएगा। मै दुखी होकर बैठ गई। आज कितना मेक अप किया था मैंने। लेकिन मेरे सपनों के राजकुमार का तो पता ही नहीं था। मैंने बाहर जाकर एक बार फिर से देखा तो निशांत मुझे पास ही गली में खड़ा दिखाई दिया। मै तो ख़ुशी से पागल हो गई। मैंने उसे अपने साथ लाकर रूम में अंदर आते ही दरवाजा बंद किया। उससे चिपक कर मैं किस करने लगी।

मै- “निशांत!! इतना देर क्यों करके आये। पता है मैं सुबह से ही तुम्हारा इन्तजार कर रही हूँ। तुम थे कहाँ अभी तक”

निशांत- “मेरी जान मै तुम्हारे लिए ही तो रात में आया हूँ। जिससे ज्यादा देर तक मैं तुम्हारे साथ रह सकूं”

मै- “आज तुम मेरे साथ पूरी रात रहोगे??”

निशांत- “हाँ इसीलिए तो शाम को आया हूँ। घर पर बुआ को बता दूंगा। मै अपने दोस्त के रूम पर रूक गया हूँ”

अब तो मेरी ख़ुशी बहुत ज्यादा हो गई थी। मुझे भी पता था कि वो मुझे चोदने के लिए ही आज रुका है। मैं भी खाना बनाने के लिए जा रही थी। उससे पहले ही मुझे उसने पकड़ लिया। मै उससे कहने लगीं- “निशांत अभी नहीं पहले मैं खाना बना लू”

निशांत- “मुझे भूख नहीं है। तुम्हे हो तो बना लेना अभी”

इतना कहकर मेरे होंठो पर अपना होंठ लगा दिया। ट्रैन से जबरदस्त चुसाई करने लगा। मेरी मुलायम गुलाबी गुलाब जैसी होंठो की पंखुड़ियों को चूस कर उसका रस निचोड़ने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मै भी उसका सर पकड़ कर साथ देने लगी। मै गर्म होने लगी। अब सब कुछ बड़ी तेजी से होने लगा। मेरी साँसे तेज हो गई। मै कांपने लगी। वो मेरी गांड पर एक दे मारी। मै तिलमिला उठी। कहने लगा- “इतनी काँप क्यों रही है”

मै- “मुझे नहीं पता मै क्यों काँप रही हूँ। लेकिन मुझे बहुत अजीब लग रहा है”

निशांत- “पहली बार है ना इसीलिए काँप रही हो”

मुझे घसीट कर बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया। मैं भी मूड बना चुकी थी। मैंने उसके सामने सलवार कुर्ता पहना हुआ था। मैने कहा- “निशांत थोड़ा धीमे धीमे करो मेरी धड़कने बढ़ जाती है। मैंने निशांत को पकड़ लिया। वो मेरे ऊपर ही लेट गया। मेरी चूंचियो को ऊपर से ही चूमते हुए। मेरी टांगो में टाँगे फसाकर बहुत ही मजा ले रहा था। गले को चूमते ही मैं बहुत ही जोश में आ गई। मैंने उसे कस के जकड लिया। वो समझ गया मै गर्म हो रही हूँ। उसने चूंचियो को दबाते हुए। मेरा कुर्ता निकाल दिया। मै गुलाबी रंग की ब्रा में उसके सामने मॉडल की तरह बैठी थी।  वो मुझे देखते ही अपने मुह में हाथ लगा लिए। मेरी चूंचियो की चमक से उसकी आँखे चौंधिया गई। मेरे दोनों कबूतर ब्रा की जाल में फसे हुए थे। उसने निकाल कर आजाद कर दिया। फिर उनके साथ किसी छोटे बच्चे की तरह खेलने लगा। उसने मेरी कबूतरों के साथ अपने होंठ लगा कर किस करके चूसने लगा। अब वो मुसम्मी की तरह निचोड़ रहा था। मुझे ये सब सहन नहीं हों पा रहा था। मैं उसको अपने दबाते हुए“..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की सिसकारी भरने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रख कर मसलने लगा। आह आह के साथ मैंने उसके हाथों को पकड़ कर और जल्दी जल्दी अपनी चूत को मलने लगी। उसने मुझे आजाद करते हुए। मेरे ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया।

अपने पैंट को निकालते हुए उसने अपने लंड के दर्शन करवाया। मैंने अभी तक किसी का लंड नही छुआ था। उसने मेरा हाथ पकड़ कर उसको अपने लंड पे राजा पर रख दिया। पहले तो वो मुझे कुछ नरम नरम लगा। उसके बाद वो बहुत ही टाइट हो गया। बिल्कुल आइसक्रीम की कोन की तरह। उसने कहा- “अब इसे लॉलीपॉप की तरह चूसो”

मैंने चूसने से मना कर दिया। मैंने बताया मुझे उल्टी हो जायेगी। उसने कुछ नहीं कहा। मेरे गालो पर ही अपना लंड रगड़ने लगा। उसने मेरी सलवार के नाड़े को खींचकर खोल दिया। पैंटी सहित उसको निकाल कर मुझे नंगा कर दिया।  मै तड़पती हुई बिस्तर के चादर को हाथो में लपेट कर दबा रही थी। उसने मेरी टांगो को फैलाकर चूत के दर्शन किया। चिकनी चूत को देखते ही उसकी जीभ लपलपाने लगी। उसने मेरी चूत को चाट कर साफ़ करने लगा। दोनों टुकड़ो के बीच में अपनी जीभ को फसाकर मेरी गांड को दबा रहा था। मैं उसका मुह अपनी योनि में दबा रही थी। अंदर तक जीभ डाल कर उसने चूत की साफ़ सफाई कर डाली। मेरी चूत ने भी लंड के आने की ख़ुशी में थोड़ा बहुत जल छिड़क डाला। उसने अपना मुह हटाकर मेरी चूत में अपना लंड रगड़ने लगा। मै अब बहुत बेकरार हो गई थी। उसने गर्म गर्म अपना लंड मेरी चूत में डालने के लिए छेद पर रख दिया। मै तडप उठी। उसने मेरी चूत में लंड को धकेल दिया। मेरी चूत में उसका टोपा जाकर फस गया। मै जोर जोर से “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की चीख निकाल दी।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था। उसका बड़ा मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ डाला। बिना मेरा  दर्द समझे वो धक्के पर धक्का मार कर मेरी चूत में अपना लंड जड़ तक घुसा कर जोर जोर से मेरी टांगो को पकड़ कर चोदने लगा। घच घच पच की आवाज एक लय में सुनाई दे रही थी। मैं भी “….उंह उंह” की आवाज से सुर ताल मिला रही थी। उसने मुझे उठा लिया। उसके बाद मेरी एक टांग उठाकर धका धक् पेल रहा था। मेरी चूंचिया हिल रही थी। उसके लंड की गोलियां मेरी टांगो पर कभी कभी लग रही थीं। उसने मेरी चूत को फाड़कर उसका भरता बना डाला। जोर जोर से चुदाई का माहौल बन गया।

 उसने भीं अपनी गाड़ी तेज चलाई। हचक हचक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मुझे  दर्द दे रहा था। मैं भी बहुत उत्तेजित होने लगी। मुझे भी उस दर्द में मजा आने लगा। वो कुछ ही देर में थक गया। वो बिस्तर पर लेट गया। मै भले ही अभी तक चुदी न थी। लेकिंन फिर भी काफी स्टाइल मैने ब्लू फिल्मो से सीखा था। मै उसके लंड को खड़ा करके चूत रख के बैठने लगी। धीरे धीरे मेरी चूत ने उसका पूरा लंड जड़ तक ले लिया। मै भी उछल उछल कर चुदवाने लगी। वो मेरी चूत में अपना लंड कमर उठा उठा कर पेलने लगा। मेरी चूत में अब दुगनी स्पीड से लंड अंदर बाहर हो रहा था। मैं बहुत ही जोर जोर से उछलने लगी। मै झड़ने की स्थिति में पहुचती। उससे पहले मेरी चूत से उसने लंड निकाल लिया। मै भी झड़ने से बच गई। उसने मुझे कुतिया बनाकर कुत्तो की तरह मेरे पीछे चूत चुदाई करने लगा।

मेरी कमर पकड़ कर उसने जोर जोर से झटके पर झटका लगाना शुरू किया। मै बहुत ही तेज तेज चीखने लगी। वो भी झड़ने वाला था। उसके चोदने की रफ़्तार का कुछ पता ही नहीं चल रहा था। मेरी चूत ने भी अपना माल निकाल दिया। उसने माल चूत में लगे लगें ही कुछ देर तक चोदा। उसके बाद मेरी चूत से अपना लंड निकाल कर वो भी मुठ मार कर मेरी चूंचियो पर ही झड़ दिया। उसके बाद पूरी रात चुदाई की। फिर आज तक उसके साथ सिर्फ फोन सेक्स कर पाती हूँ। अगर गॉड ने चाहा तो मुझे फिर से उसका लंड खाने का मौका मिल जाएगा।

 

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