चूत पर चोदने वाले का नाम नहीं लिखा होता


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कुछ दिन पहले हमारे रिश्ते में एक शादी में हम सभी गए थे।
बहुत सारे रिश्तेदार आए हुए थे। मैं भी बहुत उत्साह से इसमें शामिल हुई थी।
मेरे रिश्ते का एक देवर शिशिर खूब जवान और खूबसूरत था, उससे मेरी खूब ठिठोली और मजाक चला करती थी, वो भी वहाँ आया हुआ था।
वो बड़ा गठीला बदन, भरी पूरी ऊँचाई, कातिल हँसी, कुल मिला कर सजीला गबरू जवान था।
मुझे मालूम था कि वो भी मुझ पर नज़र रखता था। कई बार मुझे जाने-अनजाने में छूने और लिपटने की कोशिश भी करता था। मेरा दिल भी उस पर बेईमान था।
उस दिन उसने मुझसे कहा- आप सेक्सी लग रही हो..!
तो मेरा चेहरा भी खिल उठा, फिर हम तैयार होने अपने-अपने रूम में चले गए, मेरा और उसका रूम आमने-सामने था। फिर हम लोग जब पार्टी में जा रहे थे, तो संयोगवश लिफ्ट में हम अकेले ही थे।
उसने मौका देख सामने शीशे में देख कर कहा- आज तो सिर्फ तुम्हीं तुम दिख रही हो..!
और यह बोल कर उसने मेरे गाल दबा दिए तो मैं कुछ नहीं बोलीं, बस अन्दर ही अन्दर मचल कर रह गई।
और फिर हम लोग शादी के कार्यक्रम में शामिल हो गए।
उस रात उसने मुझसे खूब मजाक किया और मैंने भी उसके मजाक का आनन्द लिया।
अगले दिन सुबह जब वो नहाने के लिए जा रहा था, तो मेरे सामने आते ही, उस का चेहरा और शरीर खिल उठा था। मैंने उसकी पैन्ट को देखा तो उसमें उसका लिंग तन गया था और बड़ा खूबसूरत दिख रहा था।
मेरी चूत तो उसे देख कर ही पनिया गई थी। कुछ भी कर के अब तो मुझे उस से चुदना ही था। मैं तरकीब सोचने लगी।
मैंने उसकी तरफ आँख मारी और उसके लंड की तरफ उसको इशारा किया।
एक बार तो वो शरमा गया, फिर धीरे से मेरे पास आ कर मेरे गाल के बिल्कुल नज़दीक आ कर मेरे कान में धीरे से बोला- कैसा लगा..? अच्छा है ना..! पसन्द है..?


मैं भी शरमा कर भाग गई। अब मेरा चुदना लगभग तय था। अब मेरी बारी थी। मैंने सोच लिया कि अब मैं भी उसे कुछ दिखाऊँ।
जैसे ही वो नहा कर निकला मैं बाथरूम में घुसी और धीरे से उससे कहा- यहीं बाहर ही रुकना, कुछ दिखाना है।
उसने कहा- ओके…!
मैं बाथरूम से नहा कर बिना ब्रा के गीला टॉप पहन कर बाहर आ गई। उस का मुँह तो जैसे खुला का खुला रह गया।
मैं मुस