कुंवारी लड़की की सील तोड़ी – चुत की चुदाई


Click to Download this video!

loading...

मैंने बी एस सी पास कर ली थी, एक दिन मम्मी पापा की बात सुन ली। “यशू तो अब ग्रेजुएट हो गई है, अब उसका ब्याह कर देना चाहिये।” पापा ने मम्मी से कहा। हाँ, ठीक है, बी एड तो बाद में भी कर लेगी। आप संजीव की बात कर रहे हैं ना? हाँ वही ! खासी पैसे वाली पार्टी है, मुम्बई में अच्छा बिजनेस है। लड़का भी सुन्दर है देखा-भाला है। मैंने भी संजीव को देखा था वो तो बिल्कुल रणवीर कपूर की तरह स्मार्ट और सुन्दर था। उसके पास तो कई कारें थी। मेरा मन खुशी से भर गया। बात चल निकली थी, sexy stories पत्राचार होने लगा था, सगाई का समय दिवाली के बाद तय हुआ और शादी गर्मी के दिनों में तय हुई।

सभी कुछ अब तो निश्चित ही था, समय पास आता जा रहा था। वर्षा ॠतु भी बीत चुकी थी… नवरात्रे चल रहे रहे थे, मैं तो बस संजीव के ख्यालों में खोई रहने लगी थी। कभी कभी रात को मुझे उसके सलोने शरीर का भी विचार आ जाता था। उसका लण्ड कैसा होगा… उमेश की तरह…? उंह नहीं… अंकित की तरह होगा… ना ना वो तो ठिगना है तो फ़िर? मेरा संजीव तो लम्बा है… यानि कुछ कुछ राहुल जैसा होगा संजीव… उसका लण्ड भी राहुल की तरह मोटा और भारी होगा…? कैसा लगेगा जब वो मेरी फ़ुद्दी में घुसेगा तो…? मुझे पता है वो तो राहुल के लण्ड की तरह ही मस्त होगा।

फिर रात को जाने कब मैं चुदाई के बारे में सोच सोच कर झड़ तक जाती थी। उफ़… सत्यानाश हो इस जवानी का…। अभी तो दशहरा आने वाला था फिर दीवाली… कोशिश करूँगी कि सगाई के समय एक बार तो उससे चुदवा ही लूँ… पर दीवाली में तो अभी एक महीना है… धत्त… साला कैसे समय कटेगा।

उन्ही दिनों मेरा चचेरा भाई अशोक मेरे घर आया हुआ था। साधारण कद काठी का दुबला पतला सा… पर चंचल स्वभाव का था वो। उसने बस इसी साल कॉलेज में प्रवेश लिया ही था।

मेरा तो रोज ही संजीव के बारे में सोच सोच कर बुरा हाल हो रहा था। अब तो मुझे लगने लगा था कि बस वो एक बार आ कर मुझे जोर से चोद जाये। एक अनदेखे लण्ड की चाह में मेरी चूत बार बार टसुए बहा रही थी।

मुझे शादी के बारे में कुछ गुप्त बातें पता भी करनी थी कि कैसे मर्द को खुश रखा जाता है, उसे वास्तव में क्या क्या चाहिये होता है… और भी ना जाने क्या क्या मन में था। चुदाई के बारे में तो मैं सब कुछ जानती थी, शायद उसमें कुछ भी जानना बाकी नहीं था। फ़िलहाल अभी तो अशोक आंखो के सामने था। अभी तो मुझे संजीव जैसा तो अशोक ही नजर आ रहा था… । उसी से पूछूँगी… वो तो सब बता ही देगा। पर मेरे छोटे से मन को कौन समझाये कि अशोक तो खुद ही एक नासमझ लड़का था… जाने वो क्या समझ बैठे।

मैंने अशोक को जाते देख कर आवाज दी- कहाँ जा रहा है?

“बस मन्दिर तक… अभी आता हूँ।”

घर के सामने ही मन्दिर था। वो दस मिनट में ही आ गया- हाँ, बोल क्या बात है?

“अरे यार, कुछ प्राईवेट बात है, उधर चल…!”

मैं उसे अपने कमरे में ले आई और उससे धीरे से कहा- यार अशोक, तुझे तो मालूम ही है मेरी शादी होने वाली है।”

“वो तो सबकी होती है, इसमे परेशान होने वाली कौन सी बात है?”

“अरे शादी तो ठीक है… मुझे तो कुछ पूछना है।”

“अच्छा तो पूछ… क्या पूछना है।”

“मान लो यदि तेरी शादी होती तो तुझे तेरी पत्नी से क्या उम्मीदें होती?”

“अरे यशोदा… मेरी बहन… मत पूछ… बस सबसे पहले तो मैं चाहूँगा कि वो मुझे खूब प्यार करे…!”

“अच्छा और…?”

“फिर बस मस्ती से चुदवा ले ! अरे… सॉरी…”

“अरे कुछ नहीं… चलता है। मरवायेगा साला… धीरे बोल…”

उसके इस तरह ‘चुदवा ले’ कहने मुझे एक अजीब सा अहसास हुआ।

“क्या हुआ… ओह… मेरा मतलब है सुहागरात से था…”

“नहीं वो तो ठीक है… पर फिर तुम उससे क्या अपेक्षा रखोगे…?”

“यशू… रात को बताऊँगा… पर नाराज मत होना !”

“साला, तू क्या बतायेगा, ठीक है शाम को ही सही।”

मुझे तो उसकी बातों से लगा कि वो मुझे फ़्लर्ट करना चाह रहा है। साला कैसा बोला था मस्ती से चुदवा ले… फिर मुझे उसके लिये कुछ कशिश सी महसूस होने लगी। शायद यह संजीव के बारे में अधिक सोचने के कारण थी कि मैं अनजाने में ही चुदासी हो रही थी। मैं फिर से आकर बिस्तर पर लेट गई। मेरे मन में फिर से ऐसा लगने लगा कि संजीव मानो मुझे चोद रहा हो। मेरा काला टाईट पजामा मानो शरीर में चुभने लगा था। मेरी छोटी छोटी सी चूचियाँ कड़ी हो गई। निप्पल तो फ़ूल कर जैसे फ़ट जायेंगे। ओह्ह… मैंने जल्दी से अपनी टाईट पजमिया उतार दी और एक ढीला ढाला सा घर का पायजामा पहन लिया। पर तन तो जैसे अकड़ा जा रहा था। उसी समय वहाँ से अशोक गुजरा। ना चाहते हुये भी मैंने उसे आवाज दे कर अपने कमरे में बुला लिया, तुरन्त दरवाजे को बन्द कर दिया।

“वो तूने तो बताया ही नहीं कि…?”

“चुप… देख बताता हूँ… तूने कभी किसी लड़के से दोस्ती की है?”

“अरे ना बाबा ना… मैंने तो किसी लड़के के बारे में सोचा तक नहीं !” झूठ बोलने में तो मेरा क्या जाता। मैं क्यू बताऊँ कि मैं तो स्कूल के समय से ही चुदाती आ रही हूँ।

“तभी तो ये उतावलापन है… तुझे तो पूरा ही समझाना पड़ेगा।”

“तो समझा दे ना रे… मुझे भी कुछ तो पहले से ही मालूम रहेगा।”

“देख, तू यहाँ बिस्तर पर बैठ जा… हाँ ऐसे…”

उसके बताने पर मैं बिस्तर पर अपने पांव को समेट कर बैठ गई। उसने पास में पड़ी मेरी चुन्नी मेरे सर पर यूँ डाल दी जैसे कि घूंघट हो। मुझे तो ये सब पता था… पर उसके साथ ये सब करने में खेल जैसा लग रहा था।

“अब मान ले कि मैं संजीव हूँ… देख बीच में कोई गड़बड़ मत करना… मुझे संजीव ही समझना।”

“अरे ठीक है ना… अब आगे तो बोल।”

उसने आगे बढ़ कर धीरे से मेरा घूंघट उठाया और मेरी ठुड्डी पकड़ कर मेरा चेहरा ऊपर उठाया। मुझे तो वास्तव में अब शरम आने लगी थी।

“बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

मेरी आँखे स्वतः ही झुक गई थी, शर्म सी भी आने लगी थी, मानो सच में संजीव ही हो।

“तुम्हारे गोरे गोरे गाल, ये सुन्दर आँखें, ये गुलाबी होंठ… चूमने को मन करता है।”

अरे बाप रे… मेरी तो सांसें अपने आप तेज होने लगी। छोटी छोटी छतियाँ लम्बी सांसों के कारण ऊपर नीचे होने लगी। उसका चेहरा मेरे नजदीक आ गया। उसने जानबूझ कर मेरे होंठो से अपने होंठ टकरा दिये। मेरी आँखें किसी दुल्हन की तरह बन्द सी होने लगी।

उसने थोड़ा सा इन्तजार किया… मेरे विरोध ना करने पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों पर दबा दिये। मेरा मुख अपने आप खुल गया… उसने मेरे नीचे के होंठ अपने होंठों से चूस लिये। मैंने भी उसकी सहायता की। मुझे भी लग रहा था कि इस समय मुझे कोई रगड़ कर रख दे ! मेरा सारा तन झनझना रहा था, एक अनजानी कसक से तड़पने लगा था। मेरी चूचियाँ तन कर कठोर हो गई थी।

अचानक उसके हाथ मेरे छोटे से कठोर मम्मों पर आ गये। मुझे राहत सी लगी… बस अब जोर जोर से दबा दे मेरी तड़पती हुई चूचियों को…

उसने मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। वो मुझ पर तिरछा लेट गया। वो मुझे बेतहाशा चूमने लगा। मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगी थी। मेरा तन चुदासा होता जा रहा था… चूत को लण्ड खाने की जोर से लग रही थी। यह भूल गई थी कि ये सब मेरे साथ मेरा चचेरा भाई ही कर रहा था। उसने मेरी छातियाँ ज्यों ही दबाई, मेरे तन में चिंगारियाँ छूटने लगी। चूत सम्भोग के लिये अपने आप ही तैयार हो गई थी। उसमें से प्यार की बूंदें रिसने लगी थी। मैंने भी अनजाने में अपने हाथ उसकी कमर के इर्द गिर्द कस लिया था। मेरी टांगें चुदने के लिये बरबस ही उठने लगी थी। एक तेज मीठी सी खुजली चूत में होने लगी थी।

अचानक अशोक ने मेरा टॉप ऊपर से खींच कर उतार दिया। मैं और भी उन्मुक्त सी हो उठी। मेरी कठोर चूचियाँ खुली हवा में नंगी हो गई थी।

तभी अशोक ने भी अपनी कमीज उतार दी, उसने अपनी टांगें उठा कर मेरी कमर में फ़ंसा दी… फिर धीरे से सरक कर मेरे ऊपर आ गया और मुझे दबा लिया।

“उफ़्फ़… ये क्या… अह्ह्ह्ह… अशोक… उफ़्फ़ !!”

“बस तुम्हें संजीव के यही करना है।”

“अशोक… उह्ह्ह… कितना मजा आ रहा है…”

“अब चुदने की लग रही है ना… चोद दूँ…?”

“तू क्या कह रहा है? बहुत खराब है तू तो…?”

तब उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

उसने बैठ कर मेरी टांगें ऊँची करके मेरा ढीला ढाला सा पायजामा उतार दिया। मेरा मन खिल उठा… सच में अब तो चुदाई का आनन्द आ ही जायेगा। मुझे उसने अब पूरी नंगी कर दिया था। उसने भी जल्दी से अपनी पैंट उतार दी और मेरे ऊपर नंगा लेट गया। हाय रे… दो नंगे जिस्म… आपस में मिल गये…

गर्म गर्म से शरीर का कितना सुखद स्पर्श लग रहा था, उसका भारी लण्ड मेरी पनियाई हुई चूत को रगड़ रहा था, उसका खिला हुआ सुपारा मेरी गीली चूत को रगड़ा मार रहा था।

मेरी तो सांसें सांसें बहुत तेज हो उठी थी। धड़कन भी तेजी लिये हुये थी।

“उफ़्फ़्फ़… जाने देर क्यूँ कर रहा है…”

दोनों के शरीर चिपक गये थे, एक दूसरे को दबा रहे थे।

हम दोनों ही तेज वासना की अनुभूति में डूबे जा रहे थे। तभी मुझे उसके सुपारे का दबाव अपनी चूत पर महसूस किया। मारे गुदगुदी के मैंने भी अपनी चूत का दबाव उसके लण्ड पर डाल दिया। एक तेज कसाव के साथ उसका लण्ड मेरी चूत में उतरने लगा। तभी उसने मुझे एक जोर से शॉट मारा और भचाक से उसका पूरा लण्ड भीतर बैठ गया। मेरे मुख से एक आनन्द भरी चीख सी निकल गई।

“अरे अशोक… लगता है मेरी झिल्ली फ़ट गई…!”

मेरा यह नाटक हर एक नये लड़के के साथ हुआ करता था ताकि उसे लगे कि यह तो फ़्रेश माल है। मारे आनन्द के मैंने उसे जोर से दबा लिया। वो भी मुझे फ़्रेश लड़की जान कर रुक गया… पर मुझे तो जोर से लौड़ा लेने की इच्छा हो रही थी। जोश में मैंने अपनी चूत उछाल दी।

“धीरे से जान… लग जायेगी…”

“ओह, बहुत दर्द हो रहा है।” कहकर मैंने फिर से अपनी कमर चला दी।

फिर तो उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी। दुबला पतला लड़का था सो कमर उसकी तेजी से चल रही थी। मैं भी कस कस कर जवाब दे रही थी।

थप-थप की आवाजें तेज हो गई थी। तेज भचीड़ों से मैं निहाल होने लगी थी। मैं तो चरम सीमा को लांघने ही वाली थी… पर अशोक की अदा ने मुझे जोर से झड़ा दिया। उसने मेरे चूचक को खींच कर मसल दिया। मेरी चूत में एक आग सी उठी और… और मैं जोर से झड़ने लगी।

उसने भी किसी फ़िल्मी स्टाईल में अपना लण्ड चूत से बाहर निकाला और तेजी से मुठ्ठ मारते हुये अपना वीर्य हवा में उछाल दिया। उसकी पिचकारियाँ मन को मोह लेने वाली थी। एक के बाद एक पिचकारी ! धीमी पड़ती गई और अन्त में बून्द बून्द को निचोड़ कर उसने अपना कार्यक्रम सम्पन्न किया।

चोदने के बाद फिर वो उछल कर किसी खिलाड़ी की तरह बिस्तर के नीचे खड़ा हो गया। मैं भी जल्दी से अपने कपड़े खींच कर पहनने लगी।

“अब तुम्हें समझ में आ गया कि संजीव को क्या चाहिये?”

“उंहु, अभी पूरा समझ में नहीं आया…” मैं उसे टेढ़ी नज़र से देख कर मुस्कराई।

“अब क्या रह गया है…?”

“यह तो सामने स्वर्ग का दरवाजा खुला पड़ा था तो झण्डे गाड़ दिये… पाताल लोक में झण्डे गाड़ो तो पता चले कि जनाब कितने पानी में हैं।’

“वो क्या होता है…?”

रात को इसी कमरे में आ जाना… और पाताल लोक में झण्डे गाड़ देना। मेरी तिरछी निगाह उसे गाण्ड मारने का निमन्त्रण दे रही थी।

मैं रात को अशोक का इन्तजार करने लगी। जब रात के ग्यारह बजने लगे तो मुझे नींद सी आने लगी। चूत की खुजली भी तेज होने लगी थी। मैं चुदासी भी हो चली थी। तरह तरह के चुदने के विचार आ रहे थे। इन्हीं मधुर विचारों में न जाने कब मेरी आँख लग गई।सपने में भी मैं अशोक से चुद रही थी। तभी जैसे मेरी आँख खुल गई। अंधेरे में मुझे लगा कि अशोक आ गया है।

“कितनी देर कर दी?”

“श…श श… चुप रहो…!” उसके फ़ुसफ़ुसाने की सी आवाज आई।

वो चुप से मेरे बिस्तर पर आ कर लेट गया। उसने अपनी पैंट उतार दी। मैं तो पहले ही छोटी सी शमीज पहने हुए थी तो कमर से ऊपर उठा ली। मेरी खूबसूरत गोल गाण्ड से उसका लण्ड सट सा गया। मैंने तेल लगा कर पहले ही उसे चिकनी कर दी थी पर उसका लण्ड तो आगे बढ़ गया और मेरी चूत को टटोलने लगा।

“अरे ये क्या कर रहे हो? बात तो पाताल लोक की हुई थी, स्वर्ग लोक की नहीं।”

“श…श श…!” वो मुझे चुप ही कराता रहा। मैंने बहुत कोशिश की कि उसे अपनी चूत से दूर रखूँ पर क्या करती उसकी ताकत के आगे फिर मैंने समर्पण कर दिया और उसका सख्त लौड़ा मेरी चूत में घुसता चला गया।

इस बार कितना भारी लग रहा था उसका लण्ड, लग रहा था कि बहुत जोश में था। जाने उसका लण्ड इतना लम्बा कैसे हो गया था कि मेरी चूत की गहराई को वो आसानी से नाप रहा था। उसके धक्के भी चूत में कसे कसे से लग रहे थे।

“बहुत मजा आ रहा है जानू… जरा तेजी से चोदो !”

“हाँ रानी… तेरी चूत तो कितनी कसी है…!”

मेरा दिल धक से रह गया… हाय रे…! यह क्या हो गया… यह कौन है… कौन चोद रहा है मुझे… किसकी आवाज है ये…?

“कौन हो तुम… और तुम यहाँ कैसे आ गये…?”

“मैं रवि… वही अशोक के बचपन का दोस्त… यशोदा जी प्लीज… तुम्हें चोदने की मेरी दिली तमन्ना थी।”

“तो अशोक कहाँ है?”

उसके लण्ड में तो सवेरे चोदते समय चोट लग गई थी। जब मैंने अपने दिल की बात बताई तो उसने मुझे भेज दिया।

“ओह्ह, तो तुम हो रवि… साला मुझे तो डरा ही दिया था।”

मैंने अब तसल्ली से अपनी टांगें चुदने के लिये फ़ैला दी। अब वो और मस्ती से गहराई तक शॉट लगाने लगा था। मेरी एक टांग उसने थाम रखी थी। मेरी नर्म चूत को वो कस कर पेल रहा था। मेरी चूत को अखिर तृप्ति मिल ही गई और मैं जोर से झड़ गई।

‘बस करो अब रवि… मुझे लग रही है…!”

“पीछे की मार दूँ…?”

“तो पहले क्या कह रही थी मैं… तुम तो सुन ही कहाँ रहे थे…”

“पहले यशोदा जी… आपको चोद कर मजे तो ले लेता फिर गाण्ड के मजे लेता…”

उसका मोटा लण्ड मेरी गाण्ड के छल्ले में फ़ंस सा गया। बहुत मोटा था…

“अरे धीरे से…बहुत मोटा है यह तो…!”

“यशोदा जी… आपको तकलीफ़ नहीं होने दूंगा…”

उसने इस बार हल्का सा जोर लगाया… लण्ड धीरे से अन्दर सरक गया।

“उफ़्फ़ ! साला, क्या मूसल जैसा है… ! उईईईई जरा धीरे ना… मेरी फ़ट जायेगी।”

उसने पहले तो बाहर निकाला फिर वापस अन्दर कर दिया। उफ़्फ़, पहले तो ऐसी तकलीफ़ कभी नहीं हुई थी। वो अब अपना लण्ड थोड़ा सा घुसा कर लेट गया। मुझे अपनी गाण्ड में लण्ड बहुत भारी सा लग रहा था… कुछ कुछ फ़ंसा हुआ सा… मैंने ही धीरे से गाण्ड का दबाव उसके लण्ड पर डाला। उसने भी दबाव महसूस किया और लण्ड को भीतर घुसेड़ दिया।

“ओ ओ… बस बस… यह तो बहुत मोटा है, इसे निकाल ही दो प्लीज !”

पर हुआ उल्टा ही… उसने लण्ड को और अन्दर दबा डाला।

“अरे ! अरे, क्या कर रहे हो…? बोला ना, बस करो…!”

“तेरी तो भेन की भोसड़ी… चुप से पड़ी रह…”

उसकी भाषा सुन कर मैं तो जैसे सुन्न सी रह गई पर उसने अपने आप पर काबू पाया और बोला- अरे, आराम से गाण्ड चोदने दे… देख तकलीफ़ नहीं होने दूंगा… अब रोक मत मुझे।

अब वह लण्ड को दबा कर भीतर घुसेड़ने लगा। दर्द तो नहीं हुआ पर लण्ड फ़ंसते हुये अन्दर जा रहा था।

“ले पूरा बैठ गया ना… नहीं हुई ना तकलीफ़?”

‘उफ़्फ़… सच कहते हो… मजा आ गया… अब चल चोद मेरी गाण्ड…!”

उसने मेरी कमर को थाम कर लण्ड को आहिस्ते से चलाना शुरू कर दिया। धीरे धीरे गाण्ड ने लण्ड के साईज के अनुसार खुद को सेट कर लिया। अब रवि मेरी गाण्ड आराम से चोद रहा था। इतनी देर में शायद मेरी चूत में भी गर्मी आ गई थी और चूत पानी छोड़ने लगी थी। अब तो मेरा पूरा शरीर लय में आगे पीछे हो कर गाण्ड की चुदाई में मदद कर रहा था। रवि भी मेरी कसी गाण्ड की मार कब तक झेलता। उसने मेरी गाण्ड में ही वीर्यपात कर दिया।

“मेरी चूत में तो आग लग गई है… अब क्या करूँ रवि? बुझा दो प्लीज।”

उसने तुरन्त मेरी चूत से अपना मुख चिपका दिया और मेरे दाने को चूस चूस कर मुझे झड़ा दिया। मैंने गहरी सांस ली और निढाल सी पड़ गई।

रवि अंधेरे में ही उठा और अपने कपड़े पहन कर चुपके बाहर निकल गया। मैं लेटी लेटी सोचती रही कि अशोक से तो ये रवि ही जोरदार है… इससे चुदवा कर बहुत मजा आया। ये संजीव तो मुझे हर जगह चुदवा कर ही छोड़ेगा देखना। कैसी आग लगा दी है मन में उसने… हाय कैसा है ये जालिम। लगता है संजीव तो जब चोदेगा तो तब देखा जायेगा… दुनिया तो मुझे पहले ही चोद डालेगी।



loading...

और कहानिया

loading...


Online porn video at mobile phone


राज विडीओ सेक्स भाबी के सातkamukta.comचावट कथा बहन की लड़कीसौतेले बाप से की चुदाई की कहानियाwww.hinde sex kahane.comindiyan sex vale boy ke phone namber and namber xxx videopdos me gand mdriHENDE.XXX.KAHNE.CUDAE.KEsaxe kahane saxcompariwar me chudai ke bhukhe or nange logsabse bade land n cot fadi hindi kahani mलम्बे लड़की सैकसीविडीयो आनलाईन सुन्दर चुत पतली mote land Se bahan betiyo ki chudai ki kahanixnxxx salbar samij may hindeनॉनवेज सटोरी डाट काममाँ बहन लेसिबन काहानियाmausa ne maa ke jhaant ke baal saaf karke choda sex storiessex.kahne.bau.enMalis ke khani xxx bhen ma bete xxx kjaniantarvasna vaasna me doobi kahaniyanveshya ka chudvana movie x videonindome.maaki.bur.choda.xxxबिवि कि हसतमेथुन करने का मजाhindi sexi kahaniक्सक्सक्स कहानीAntervasna sitoriuncle ne dulhan bana seal todi kamukta.comhot xxx story in urdu with unclebhabhiji xxkahaniaभतीजे नेभाबी जबरदस्ति चोदाxxx khani hindi maiहाय दैया मैं चुद गईrat mein nind mein chudai storyxnxxdehat gharxxxbalu ma bata chudi ke kanipadosi aunty ki chudai2018 in hindi storySEXY MOTTI ANTTI KI KHANIYAकुवारी लडकी सील तुड़वाईmastram kahani sax images kisexy bhabi anty sas hindiलुली का खेल सेकसी कहानीयांwww dost ka sath us ke ma ko b choda xxx kahani comMY BHABHI .COM hidi sexkhanepudi lawdacudaiantarvasnahinb sexsexy story aunty ne manayacaci vathija sexx kahaniANTARVASNA JABRJASTI CHOTI LADKI KIनिनद मे सोते समय सेक्स पोरनभाइ से चुदकर मजा अागयाजेठ ने चोदा पहिली बारhindi kahani chachi ni bothroom me sekhixxx hindi cudi kahnya maa buvaआंटी आंटी की लड़की के साथ क्सक्सन्स की कहानियाँsexy phly ban wala xxx videoजपानी लरकी बुर फारा कहानीया HDइंडियन मम्मी अन्तर्वासना साडी स्टोरीसेकस कि कहानियाaashishi caca ki xxxx kahniwww new kamkuta hot sexi ladki comghar par aaye cousin se sex kiyastory bahe kochoda pata ke hindi me xxx imageAnti sex marathi storydesi girl panti me hath dal kar hilati huisax story dedeki hindinichot ki khani photo shit hindi meगलॅ फ्रेड की चुत फाडीxxx bdi mom rep hd hindi love.compathan ne mummy ko chodaपोन चुदाई विडयो भाई देख रहा बहन ऩे देखाkamukta ma ka bltkar sadi mebai ne apni choti bahan ko jbrdasti choda sexy adios storyविडीयो सेक्सी हिन्दी मे भाभी ने कहा देवर जी मेरी गाड मे तेल लगाकर चोदोIndian Ghati आटी sexy.comdede ki saxe khane comBhai ny bujhai bhain ki peyas saxi movis fullsaxxy kahania san mom sisबुर मैं बोतल डाल कर पेलनाIndian cute hindi sex nonvegstorieswww.hinde sex kahane.comhindi sex vido storikaha.in.hindi.xxxसबसे गनदे sex कि xxx कहानिया हिनदी मेदिपावली रात मा बेटा चुदाइ की कहानी खेत खेत मेनसे मे कर वाई चूदाई की कहनीमस्तराम भतीजीDidi ko figuring ka vdo बना कर chodaमैने लड पकड लियाchudaiki sexy kahaniya comhindi font/archivexxx chudai ki khani